निबंध किसे कहते हैं? परिभाषा एवं प्रकार- Nibandh Kise Kahate Hain in Hindi

निबंध किसे कहते हैं? परिभाषा एवं प्रकार- Nibandh Kise Kahate Hain in Hindi

निबंध किसे कहते हैं तथा यह कितने प्रकार के होते हैं निबंध की क्या विशेषताएं होती हैं आपके भी मन में यह प्रश्न आया है कि आखिर निबंध किसे कहते हैं। (Nibandh Kise Kahate Hain In Hindi) और निबंध कैसे लिखें। जहां तक मुझे लगता है कि कई सारे लोगों को सही मायने में निबंध का मतलब भी पता नहीं होगा।

अगर आप भी उन्हीं लोगों में से हैं जो कि निबंध के बारे में जानना चाहते हैं कि Nibandh Kise Kahate Hain निबंध कितने प्रकार के होते हैं? निबंध के अंग कौन कौन से होते हैं? तथा निबंध कैसे लिखे तो यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी।

दोस्तों निबंध शब्द से हम बचपन से ही वाकिफ होते हुए आ रहे हैं लेकिन अगर देखा जाए तो निबंध किसे कहते हैं। यह बहुत कम लोगों को पता होगा तो आज मैंने सोचा कि मैं आपको इसी विषय पर जानकारी देता हूं।

निबंध किसे कहते हैं-

निबंध शब्द ‘नि+बंध’ से बना है जिसका अर्थ है अच्छी तरह से बना हुआ। इनकी भाषा विषय के अनुकूल होती है। निबंध की शक्ति है अच्छी भाषा। भाषा के अच्छे प्रयोग द्वारा ही भावों विचारों और अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया जा सकता है।

निबंध की परिभाषा एवं प्रकार लिखिए-

आचार्य शुक्ल के अनुसार – “यदि गद्य कवियों को कसौटी है, तो निबंध गद्य की।”

पंडित श्यामसुंदर दास के अनुसार – “निबंध वह लेख है जिसमें किसी गहन विषय पर विस्तार पूर्वक और पाठिडत्यपूर्व ढंग से विचार किया गया हो।”

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इनके विचारों को क्रमबद्ध रूप में पिरोया जाता है। इसमें ज्ञान विचार और अद्भुत संगम होता है। यद्यपि निबंध लिखने का कोई निश्चित सूत्र नहीं है।

निबंध गद्य लेखन की एक विधा है। लेकिन इस शब्द का प्रयोग किसी विषय की तार्किक और बौद्धिक विवेचना करने वाले लेखों के लिए भी किया जाता है। निबंध के पर्याय रूप में संदर्भ रचना और प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जाता है।….. लेकिन वर्तमान काल के निबंध संस्कृत के निबंधों से ठीक उल्टे हैं।

“हिंदी साहित्य कोष” में ‘निबंध’ को इस प्रकार परिभाषित किया गया है- “यह किसी विषय वस्तु पर उसके स्वरूप प्रकृति, गुण ,दोष आदि की दृष्टि से लेखक की गद्यात्मकअभिव्यक्ति है।”

डॉ ओमकार नाथ शर्मा निबंध को परिभाषित करते हुए कहते हैं – “निबंध वह लघु मर्यादित साहित्यिक विधा है, इसमें निबंधकार विषय अनुसार अपने ह्रदय स्थित भागो अनुभूतियों तथा विचारों का कलात्मक चित्रण वैसक्तिकता के साथ प्रदर्शित करता है।

डॉ जगन्नाथ प्रसाद शर्मा के अनुसार – “तर्क और पूर्णता का अधिक विचार ना रखने वाला गद्य रचना का वह प्रकार निबंध कहलाता है।” , जिसमें किसी विषय अथवा विषयांश का लघु विस्तार में स्वच्छंदता एवं आत्मीय पूर्ण ढंग से ऐसा कथन हो कि उसमें लेखक का व्यक्तित्व झलक उठे।

डॉ लक्ष्मी सागर वाष्णेय ने निबंध के तत्व को ध्यान में रखते हुए कहा है कि – “निबंध से तात्पर्य सच्चे साहित्यिक निबंधों से है जिसमें लेखक अपने आप को प्रकट करता है विषय को नहीं। विषय तो केवल बहाना मात्र होता है।”

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Nibandh Kise Kahate Hain Babu Gulab Rai Ke Anusar Nibandh Ki Paribhasha Likhiye

बाबू गुलाब राय के अनुसार निबंध की परिभाषा- बाबू गुलाब राय ने निबंध की परिभाषा में अनेक तत्वों का सम्मिश्रण करते हुए कहा है – “निबंध उस गद्य रचना को कहते हैं जिसमें एक सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन ,स्वच्छंदता, सौष्ठव और सजीवता तथा आवश्यक संगति और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।”

निबंध को गद्य की कसौटी क्यों कहा जाता है

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबंध के रहस्य को उद्घाटित करते हुए कहते हैं – “यदि गति कवियों या लेखकों की कसौटी है तो निबंध गद्य की कसौटी है। भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबंध में ही सबसे अधिक संभव होता है।” इस प्रकार निबंध किसी विषय पर विचार प्रकट करने की कला है।

निबंध का जनक किसे कहा जाता है

Nibandh Ka Janak मिशेल डी मॉन्टेग्ने को माना जाता है।

किन्हीं दो निबंधकारों एवं उनके दो-दो निबंधों के नाम लिखिए।

किन्हीं दो निबंधकारों के नाम- रवींद्रनाथ टैगोर और एम.के. गांधी।

रवींद्रनाथ टैगोर जी के निबंधों के नाम- “भारत में राष्ट्रवाद” और “चरक का पंथ”

एम.के. गांधी जी के निबंधों के नाम- “हिंद स्वराज” और “शाकाहारीवाद का नैतिक आधार”

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निबंध के प्रकार —

हिंदी निबंध को 5 भागों में बांटा गया है। वे निम्नलिखित प्रकार से हैं–

  • विचारात्मक निबंध
  • भावनात्मक निबंध
  • वर्णनात्मक निबंध
  • विवरणात्मक निबंध
  • आत्मपरख निबंध

विचारात्मक निबंध- विचारात्मक निबन्धों के अन्तर्गत विभिन्न विषयों पर पक्ष-विपक्ष, सकारात्मक – नकारात्मक आदि विचार प्रस्तुत किए जाते हैं। विज्ञान, आतंकवाद आदि निबन्ध इस श्रेणी में आते हैं।

भावनात्मक निबंध- कुछ विषय ऐसे होते हैं जिनमें भावों की प्रधानता होती है। सूक्ति, लोकोक्ति आदि पर लिखे गए निबन्ध इस श्रेणी के अन्तर्गत आते हैं, जैसे – परहित सरिस धरम नहीं भाई, साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप आदि।

वर्णनात्मक निबंध- वर्णनात्मक निबन्धों के अन्तर्गत स्थान, व्यक्ति विशेष, ऋतु-विशेष आदि से सम्बन्धित निबन्ध आते हैं।

विवरणात्मक निबंध- विवरणात्मक प्रकार के निबंधों में पौराणिक, ऐतिहासिक ,सामाजिक घटनाओं का वर्णन होता है। निबंध संवेदनशील तथा मार्मिक होते हैं। विवरण भूतकाल का होता है। प्रमुख विवरणात्मक निबंधकार इस प्रकार है – भारतेंदु हरिश्चंद्र, बालकृष्ण भट्ट, प्रताप नारायण मिश्र, शिवपूजन सिंह सहाय आदि।

आत्मपरख निबंध- आत्मपरख प्रकार के निबंधों में लेखक अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ता है। वर्तमान में जो भी निबंध लिखे जाते हैं, वे सभी आत्मपरख प्रकार के निबंध होते हैं। प्रमुख आत्मपरख निबंधकार इस प्रकार हैं — आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉक्टर विद्यानिवास मिश्र, कुबेर नाथ राय, डॉ विवेक राय आदि।

निबंध के भाग—

किसी भी विषय पर निबंध लिखते समय हमें उसे पाया कुछ एक भागों में बांटना होता है। जिसे हम निबंध की श्रेणी में प्रस्तावना, मध्य भाग और उपसंहार आदि के नाम से जानते हैं।

भूमिका – सर्वप्रथम किसी विषय पर निबंध लिखते समय उसकी प्रस्तावना या भूमिका के बारे में लिखना आवश्यक होता है। इसे हम निबंध का प्रारंभिक परिचय भी कहते हैं।

निबंध के उपरोक्त विभाग के अंतर्गत हमें विषय के संबंध में संक्षिप्त जानकारी लिखनी होती है। जिसके लिए निबंध में अलंकृत भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए और इस दौरान विषय संबंधी जिस बात पर विशेष जोर देना है उसे कैतूहल पूर्वक लिखना चाहिए।

मध्य भाग – किसी भी विषय पर निबंध लिखते समय उसके मध्य भाग में विषय के बारे में सब कुछ वर्णित किया जाना चाहिए । इस दौरान विषय से जुड़ी उसकी लाभ और हानियों का जिक्र भी किया जाना चाहिए ।

निबंध लिखते समय मध्य भाग में विचारों को विभिन्न भागों में तोड़ कर लिखना चाहिए ताकि पढ़ते समय पाठक को नीरसता न लगे।

निबंध के मध्य भाग में विषय से जुड़े कुछ दृश्य यह घटना का सुंदर शैली में वर्णन करना चाहिए इस दौरान वाक्यों मे क्रमबद्धता होनी चाहिए।

निबंध के उपरोक्त भाग में विषय से संबंधित समस्त आवश्यक जानकारियां ,अतिथि का नाम ,जगह इत्यादि का पूर्ण विवरण होना चाहिए।

कहीं-कहीं पर लेखक द्वारा निबंध के मध्य भाग को अनेक भागों में बांटकर भी लिखा जाता है इससे पाठक की रोचकता निबंध के विषय के प्रति बनी रहती है।

उपसंहार – निबंध लिखते समय जिस प्रकार भूमिका का आकर्षण होना जरूरी है उसी प्रकार से उपसंहार का रोचक तरीके से लिखा होना भी आवश्यक है प्रस्तुत भाग में लेखक को उन बातों का संक्षिप्त साथ देना चाहिए जिन्हें वह निबंध में पहले ही वर्णित कर चुका हूं इस प्रकार उपसंहार किसी भी निबंध का अंतिम भाग होता है जिसमें विषय का अंतिम चार वर्णित किया जाता है।

निबंध के तत्व—

निबंध के चार प्रमुख तत्व होते हैं जिसमें सबसे पहले आत्मा अभिव्यक्ति आता है जिसके अंतर्गत किसी विषय पर निबंध लिखते समय केवल दूसरों के मतों को ही ना लिखें अपितु लेखक को अपने निजी विचार प्रकट करने चाहिए।

दूसरा निबंध लिखते समय लेखक को कुछ इस प्रकार से लिखना चाहिए ताकि पाठक को ऐसा प्रतीत हो कि निबंध का लेखक उनसे संबंध स्थापित कर रहा हो इसके अलावा निबंध के दौरान वाक्य में तारतम्यता होनी चाहिए। ताकि निबंध का मूल उद्देश्य बना रहे साथ ही निबंध की शैली को सजीव होना चाहिए। क्योंकि यही संपूर्ण निबंध की प्राण आत्मा होती है।

निबंध के प्रारूप—

निबंध लिखने से पहले उसके प्रारूप को अवश्य जान लेना चाहिए। अगर आप निबंध लिखते समय उचित प्रारूप को ध्यान में रखते हैं। तो आप स्पष्ट रुप से अपना संदेश पाठक तक पहुंचा सकते हैं। निबंध लिखने से पहले उसकी रूपरेखा तैयार की जाती है ।जिससे प्रस्तावना, विषय वस्तु की बिंदुवार जानकारी ,लाभ हानि, कारण ,महत्व और उपसंहार को दर्शाया जाता है।

परिचय – निबंध के आरंभिक परिचय में विषय वस्तु के बारे में और मुख्य बिंदुओं की जानकारी दी जाती हैं। किसी भी निबंध का परिचय इस बात पर प्रमुख जोर देता है। कि आप किसके बारे में बात करने वाले हैं और पाठकों को क्या बताने वाले हैं।

परिचय के अंत में आप किसी विषय पर क्यों लिख रहे हैं इसके बारे में बताया जाता है। इस प्रकार से निबंध लिखते समय परिचय पर मुख्य रुप से ध्यान दिया जाता है ताकि पाठकों तक आपका संदेश स्पष्टता से पहुंच सके।

मध्य भाग – किसी निबंध के आरंभ और अंत के बीच विषय से संबंधित जो कुछ भी लिखा जाता है वह निबंध का मध्य भाग कहलाता है। इसमें निबंध के मुख्य बिंदुओं पर विस्तार से लिखा जाता है और जरूरी बातों का समावेश किया जाता है यहां किसी विषय पर विस्तृत रूप से चर्चा की जाती हैं।

उपसंहार या निष्कर्ष – यहां किसी विषय पर लिखे जा रहे निबंध का अंतिम साथ लिखा जाता है। मुख्य रूप से निबंध में समस्त बातों का उल्लेख करने के बाद उसके सभी तर्कों को एकत्रित करके यहां उस को अंतिम रूप दिया जाता है।

निबंध लेखन का तरीका—

एक श्रेष्ठ निबन्ध लेखन करने हेतु निम्नलिखित चरणों को अपनाया जाना आवश्यक है, यदि आप नीचे दिये निम्नलिखित चरणों को ध्यान में रख कर निबंध लिखते है तो आप एक बेहतरीन निबंध लिख सकते है।

1 दिए गए शीर्षक का अध्ययन यह निबन्ध लेखन का सर्वप्रथम चरण है। सर्वप्रथम शीर्षक का गम्भीरतापूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिए।

2 संकेत बिन्दुओं को समझना परीक्षा में पूछे गए निबन्ध से सम्बन्धित संकेत बिन्दुओं का ध्यानपूर्वक अध्ययन करके उनका उचित प्रयोग निबन्ध में करना चाहिए।

3 निबन्ध का प्रारूप अथवा रूपरेखा तैयार करना निबन्ध लेखन करने से पहले रूपरेखा का निर्धारण करना चाहिए, उसके बाद निबन्ध की शुरुआत करनी चाहिए।

4 क्रमबद्धता निबन्ध लिखने में विषय केन्द्रित होकर विषय-वस्तु को क्रम में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जिससे विचारों में बिखराव नहीं आता।

5 शब्द चयन एवं भाषा शैली अच्छे निबन्ध की विशेषता होती है उसमें प्रयुक्त शब्दों एवं भाषा का प्रयोग करना। निबन्ध लिखते समय शब्दों का चुनाव एवं शुद्ध भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए।

6 शब्द सीमा परीक्षा में पूछे गए निबन्ध लेखन का महत्त्वपूर्ण चरण शब्द सीमा (500) का पालन करना होता है। निबन्ध ज़्यादा छोटा या ज़्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए।

7 मुहावरे एवं सूक्तियों का प्रयोग मुहावरे, सूक्तियों एवं महापुरुषों के कथनों का प्रयोग आवश्यकतानुसार ही निबन्ध में किया जाना चाहिए।

8 उपसंहार अथवा निष्कर्ष निबन्ध का अन्तिम चरण उपसंहार है। निबन्ध का अन्त उपयुक्त एवं प्रभावी सार द्वारा किया जाना चाहिए।

निबन्ध लेखन के लिए ध्यान रखने योग्य आवश्यक बातें

  • निबन्ध को उचित प्रकार अनुच्छेदों में बाँटकर विषय-वस्तु को छोटे-छोटे वाक्यों व सरल शब्दों में लिखना चाहिए।
  • वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्दों का एवं उचित स्थानों पर विराम-चिह्नों का प्रयोग करना चाहिए।
  • क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग न करके सरल भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • समय-सीमा का ध्यान रखना अति आवश्यक है।
  • उचित स्थान पर सन्दर्भों एवं कथनों का प्रयोग करना चाहिए।अप्रासंगिक सन्दर्भों के प्रयोग से बचना चाहिए।
  • निबन्ध लेखन में लम्बी कहानियों एवं विवरण से बचना चाहिए।
  • इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि जो संकेत बिन्दु परीक्षा में दिए गए हैं उनका पालन उचित प्रकार से किया जा रहा है या नहीं।
  • निबन्ध में प्रयोग किए जा रहे शब्दों में सजीवता व सहजता का गुण होना चाहिए।
  • अधिक लम्बे वाक्यों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

FAQ-

Ques-निबंध की परिभाषा एवं प्रकार लिखिए?

Ans-पंडित श्यामसुंदर दास के अनुसार – “निबंध वह लेख है जिसमें किसी गहन विषय पर विस्तार पूर्वक और पाठिडत्यपूर्व ढंग से विचार किया गया हो।” इसके मुख्य रुप से चार प्रकार के होते है, जो निम्न है – 1). वर्णनात्मक निबन्ध, 2). विचारात्मक निबन्ध, 3). भावात्मक निबन्ध, 4). विश्लेषणात्मक निबन्ध।

Ques-निबंध के कितने अंग होते हैं?

Ans-निबंध के मुख्य रुप से तीन अंग होते है – 1). भूमिका अथवा प्रस्तावना, 2). मध्य भाग अथवा विषय का विस्तार, 3). उपसंहार अथवा निष्कर्ष

Ques-निबंध के जनक कौन है?

Ans-निबंध के जनक मिशेल डी मॉन्टेग्ने को माना जाता है।

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